PM श्री सेजेस की 11वीं की छात्रा ने प्लास्टिक से फर्नीचर बनाने का नवाचार किया, CSIT दुर्ग से मिली राष्ट्रीय स्तर की मान्यता।
आर्चना जैसी बेटियां ही असली "स्वच्छ भारत" और "स्टार्टअप इंडिया" हैं।
रायगढ़। जिसे दुनिया कचरा समझकर नजरअंदाज कर देती है, उसी प्लास्टिक में उपयोगिता और संभावनाओं का भविष्य तलाशने वाली पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ की कक्षा 11वीं की छात्रा आर्चना एक्का ने अपनी प्रतिभा और नवाचारी सोच से रायगढ़ जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। आर्चना के नवाचार ‘ईको ब्रिक बैंक : प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलना’ का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनकी रचनात्मक प्रतिभा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी संवेदनशील सोच और स्थानीय समस्या के व्यावहारिक समाधान की दिशा में उनके प्रयास का प्रमाण है।
राज्य स्तरीय मंच पर दिखाई प्रतिभा, मार्गदर्शन से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा विचार
शैक्षणिक सत्र 2025–26 में आर्चना ने दुर्ग स्थित छत्रपति शिवाजी प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIT) में आयोजित राज्य स्तरीय मार्गदर्शन सत्र में रायगढ़ जिले का प्रतिनिधित्व किया। विशेषज्ञों एवं मार्गदर्शकों के समक्ष उन्होंने अपने नवाचार का प्रतिरूप प्रस्तुत किया। प्राप्त सुझावों के आधार पर परियोजना में आवश्यक सुधार किए गए। नवाचार की उपयोगिता, पर्यावरणीय महत्व और समस्या के समाधान की क्षमता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित किया गया।
‘कचरा’ नहीं, भविष्य का संसाधन है प्लास्टिक—आर्चना ने दिखाई नई राह
‘ईको ब्रिक बैंक’ का मूल उद्देश्य फेंके गए प्लास्टिक को एकत्रित कर उसका पुनः उपयोग करते हुए टिकाऊ एवं उपयोगी उत्पाद तैयार करना है। परियोजना के माध्यम से प्लास्टिक कचरे से फर्नीचर सहित विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की संभावनाओं पर काम किया गया है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।
आर्चना का नवाचार यह संदेश देता है कि कचरे की समस्या को सही सोच और तकनीक के माध्यम से संसाधन में बदला जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पुनः उपयोग की संस्कृति और जन-जागरूकता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मार्गदर्शन और विद्यालय के प्रोत्साहन ने प्रतिभा को दिए पंख
आर्चना अपनी उपलब्धि का श्रेय अपनी मार्गदर्शक अनामिका लहरे के निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन को देती हैं। विद्यालय के प्राचार्य हकीम उल्लाह खान तथा व्याख्याता रवि कुमार यादव ने भी उनके नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
विद्यालय में विद्यार्थियों को नवाचार, प्रयोग और रचनात्मक गतिविधियों के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जाता है। यही सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान के लिए नए विचारों पर काम करने का अवसर देता है।
आर्चना की उपलब्धि बनी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
आर्चना एक्का का नवाचार राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पीएम श्री सेजेस धरमजयगढ़ और पूरे रायगढ़ जिले के लिए गौरव का क्षण है। यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा को यदि सही दिशा, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिले तो छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
आर्चना की कहानी नई पीढ़ी के लिए यह प्रेरक संदेश देती है कि बड़े बदलाव की शुरुआत हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं होती; कई बार आसपास की छोटी-सी समस्या ही एक बड़े नवाचार की नींव बन जाती है। प्लास्टिक को कचरा नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन के रूप में देखने वाली आर्चना की सोच अब राष्ट्रीय मंच पर रायगढ़ की रचनात्मक प्रतिभा का प्रतिनिधित्व कर रही है।
आर्चना का संदेश साफ है - _बड़े बदलाव के लिए बड़े संसाधन नहीं, एक छोटी सोच चाहिए।
#CGEYE24 #Raigarh #EcoBrick #BetiBachaoBetiPadhao

टिप्पणियाँ (0)
अपनी टिप्पणी लिखें