भालूनारा वनोपज नाका रात में बेनिगरानी! CCTV के भरोसे वन संपदा की सुरक्षा, ताले में बंद मिला नाका कार्यालय।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
रायगढ़/ खरसिया। खरसिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम भालूनारा में स्थापित वनोपज नाका इन दिनों रात के समय अपनी निगरानी व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। खरसिया से छाल, धरमजयगढ़, पत्थलगांव और जशपुर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित यह नाका वन उपज, लकड़ी तथा अन्य सामग्री के अवैध परिवहन पर नजर रखने के उद्देश्य से बनाया गया है। लेकिन रात के समय यहां कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं होने और कार्यालय में ताला लगे मिलने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि रात के समय भालूनारा वनोपज नाका पर मौके पर कोई वन विभाग का कर्मचारी दिखाई नहीं दिया। नाका कार्यालय पर ताला लगा हुआ मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्य मार्ग से यदि रात के समय अवैध रूप से लकड़ी या अन्य वन उपज का परिवहन किया जाए तो उसे रोकने और तत्काल कार्रवाई करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
मुख्य मार्ग होने के बावजूद रात में निगरानी पर सवाल
भालूनारा नाका जिस मार्ग पर स्थित है, वह खरसिया क्षेत्र को छाल, धरमजयगढ़, पत्थलगांव और जशपुर जैसे क्षेत्रों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस वजह से यहां से रात-दिन वाहनों की आवाजाही होती रहती है। वन संपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग पर नियमित निगरानी और जांच को महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नाके पर रात के समय कर्मचारी तैनात नहीं होंगे, तो संदिग्ध वाहनों की जांच कैसे होगी और अवैध लकड़ी के परिवहन पर तत्काल रोक कैसे लगाई जाएगी?
CCTV कैमरे रिकॉर्ड कर सकते हैं, कार्रवाई नहीं
नाके पर लगे CCTV कैमरे निश्चित रूप से गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकते हैं, लेकिन केवल कैमरों के भरोसे अवैध गतिविधियों को रोक पाना संभव नहीं है। यदि किसी वाहन में अवैध लकड़ी या वन उपज का परिवहन किया जा रहा हो, तो उसे मौके पर रोककर जांच करने के लिए कर्मचारियों की मौजूदगी आवश्यक है।
यही वजह है कि रात के समय नाके पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। कैमरे घटना को कैद कर सकते हैं, लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारी ही संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी जांच और नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
अधिकारी से संपर्क का प्रयास, नहीं हो सका संपर्क
भालूनारा वनोपज नाका पर रात में कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए खरसिया वन परिक्षेत्र अधिकारी से मोबाइल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि अधिकारी ने कॉल रिसीव नहीं किया, जिसके कारण रात की ड्यूटी व्यवस्था और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका।
यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि नाके पर रात में कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित है या नहीं, यदि ड्यूटी है तो उस समय कर्मचारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे और यदि किसी विशेष परिस्थिति के कारण कर्मचारी अनुपस्थित थे तो उसकी वैकल्पिक व्यवस्था क्या की गई थी।
अवैध लकड़ी पर कार्रवाई के बीच नाके की व्यवस्था चर्चा में
गौरतलब है कि खरसिया क्षेत्र में अवैध लकड़ी के खिलाफ वन विभाग की कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में विभाग के उड़न दस्ते और खरसिया वन परिक्षेत्र की टीम द्वारा अवैध लकड़ी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बीच भालूनारा जैसे महत्वपूर्ण नाके की रात की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना विभाग के लिए गंभीर विषय है।
क्या कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण अवैध गतिविधियों को संरक्षण मिल रहा है। इसके लिए विभागीय स्तर पर ड्यूटी रोस्टर, CCTV फुटेज और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है।
विभाग से उठ रहे हैं ये सवाल
क्या भालूनारा वनोपज नाका पर रात के समय वन कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी लगाई जाती है?
यदि ड्यूटी लगाई जाती है तो संबंधित कर्मचारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे?
नाका कार्यालय रात के समय बंद रहने की स्थिति में वाहनों की जांच कौन करता है?
CCTV की निगरानी कौन करता है और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की क्या व्यवस्था है?
मुख्य मार्ग पर स्थित इस नाके की 24 घंटे निगरानी के लिए विभाग ने क्या व्यवस्था कर रखी है?
क्या विभाग नाके की रात की ड्यूटी और CCTV रिकॉर्ड की जांच कर इस मामले में स्थिति स्पष्ट करेगा?
वन संपदा की सुरक्षा और अवैध कटाई एवं परिवहन पर रोक लगाने के लिए केवल कार्रवाई की खबरें पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संवेदनशील मार्गों पर लगातार और प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी जरूरी है। अब देखना होगा कि वन विभाग भालूनारा वनोपज नाका की रात की व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या मौके की जांच कर व्यवस्था में सुधार किया जाता है।

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