कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की संवेदनशील पहल से मृतकों के परिजनों को मिली आर्थिक सहायता, प्रशासनिक तत्परता की हो रही सराहना
रायगढ़। सर्पदंश जैसी आकस्मिक प्राकृतिक आपदा में अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई राहत की बड़ी वजह बनी है। घरघोड़ा तहसील क्षेत्र में 1 अगस्त 2026 को सर्पदंश से हुई दो मौतों के RBC (राजस्व पुस्तक परिपत्र) प्रकरणों का महज एक सप्ताह के भीतर निराकरण कर सहायता राशि का भुगतान कर दिया गया। प्रशासन की इस तेजी से आर्थिक संकट से जूझ रहे दोनों पीड़ित परिवारों को समय पर बड़ी राहत मिली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम चारमार निवासी 4 वर्षीय मंथरा धनवार की सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी। प्रकरण में उनकी माता मनीषा आवेदिका हैं। इसी तरह ग्राम कुडुमकेला निवासी 14 वर्षीय धीरज दास महंत, पिता बिसाहू दास, की भी सर्पदंश से दुखद मृत्यु हुई।
दोनों परिवारों पर अचानक आई इस विपदा के बाद प्रशासन ने कागजी प्रक्रिया को लंबित रखने के बजाय संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होते ही RBC प्रकरणों का तेजी से निराकरण करते हुए पात्र हितग्राहियों को सहायता राशि उपलब्ध कराई गई।
रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा में किसी परिवार के सदस्य को खोना बेहद पीड़ादायक होता है। ऐसे कठिन समय में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पात्र परिवारों को शासकीय सहायता के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि RBC से जुड़े प्रकरणों में आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होते ही सहायता राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके। उन्होंने आपदा से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्रवाई करने पर भी जोर दिया। इन प्रकरणों के त्वरित निराकरण में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल, घरघोड़ा एसडीएम प्रवीण तिवारी, तहसीलदार मनोज गुप्ता, नायब तहसीलदार एस.आर. पैकरा, हिमांशु सिंह, सीएमओ, थाना प्रभारी कुमार गौरव साहू सहित संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
1 अगस्त को हुई मौतों से जुड़े प्रकरणों का एक सप्ताह के भीतर निराकरण और सहायता राशि का भुगतान प्रशासनिक तत्परता का उदाहरण माना जा रहा है। इस कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में शासन की सहायता केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदनशील प्रशासन के माध्यम से उसे जरूरतमंद परिवारों तक जल्द से जल्द पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बना घरघोड़ा
घरघोड़ा तहसील की यह त्वरित कार्रवाई बताती है कि संवेदनशील सोच, अधिकारियों की तत्परता और समयबद्ध निर्णय से सरकारी सहायता वास्तविक जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचाई जा सकती है। सर्पदंश से अपनों को खोने वाले दोनों परिवारों के लिए एक सप्ताह के भीतर मिली आर्थिक सहायता मुश्किल घड़ी में प्रशासन की ओर से मिली महत्वपूर्ण राहत साबित हुई है।

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