नियम-कानून-कायदे कागजों में, सड़क पर बेखौफ गोवंश और खतरा जनता के सर।


यातायात विभाग ने अंधेरे में गोवंशों को दिखाने की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन सड़क से हटाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?... पढ़ें पूरी खबर विस्तार से...!!👇


रायगढ़। रात के अंधेरे में वाहन चालकों को सड़क पर बैठे गोवंश दूर से दिखाई दें, इसके लिए यातायात विभाग द्वारा उनके गले में रेडियम पट्टी पहनाने की पहल निश्चित रूप से सराहनीय है। लेकिन इस पहल के बीच एक बड़ा और जरूरी सवाल भी खड़ा हो गया है जब मवेशियों को सड़कों पर बैठने और घूमने से रोकने की जिम्मेदारी तय है, तो फिर रेडियम पट्टी की जरूरत ही क्यों पड़ रही है?


रेडियम राहगीरों को नजर आ रहा है, लेकिन सड़कों पर पसरा मवेशियों का खतरा जिम्मेदारों को क्यों नहीं दिख रहा?


काशीराम चौक स्थित नेशनल हाईवे पर सड़क के बीच और किनारे बैठे मवेशी तेज रफ्तार वाहनों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। स्थिति केवल काशीराम चौक तक सीमित नहीं है। शहर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर नजर डालें तो चक्रधर नगर, टीवी टावर रोड, स्टेडियम रोड, कोतरा रोड, जूटमिल गौरव पथ, छातामुड़ा चौक, बाईपास-बाबाधाम मार्ग, उड़ीसा रोड और खरसिया रोड सहित कई स्थानों पर सड़क पर मवेशियों का झुंड आसानी से दिखाई दे जाता है। यानी समस्या सामने है, खतरा सामने है और नियम भी मौजूद हैं फिर कार्रवाई कहां है?


प्रावधान कागजों में, मवेशी सड़कों पर और खतरा जनता के सिर! सड़क पर गोवंश छोड़ने वाले पशु मालिकों के खिलाफ जुर्माना और कार्रवाई के प्रावधान होने के बावजूद यदि मवेशी लगातार सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।


मुद्दा महज यातायात व्यवस्था का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनसुरक्षा का है। सड़क के बीच अचानक बैठे मवेशी को देखकर वाहन चालक को तेज ब्रेक लगाना पड़े या अचानक दिशा बदलनी पड़े, तो गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशियों का आ जाना जानलेवा साबित हो सकता है। गोवंश के गले में रेडियम पट्टी बांधना निश्चित तौर पर रात के समय उनकी दृश्यता बढ़ाने वाला एक सहायक सुरक्षा उपाय है। लेकिन इसे समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। सवाल सीधा है कि हादसा होने से पहले व्यवस्था जागेगी या हादसे के बाद जिम्मेदारी तय होगी? नगर निगम प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार एजेंसियों के सामने अब चुनौती सिर्फ सड़कों पर मवेशियों को दिखाई देने लायक बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें सड़कों पर आने से रोकने की है। इसके लिए पशु मालिकों पर नियमानुसार कार्रवाई, आवारा मवेशियों के सुरक्षित संरक्षण की व्यवस्था और प्रमुख मार्गों से मवेशियों के जमावड़े को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाना जरूरी है। गोवंश के गले में रेडियम बांधना आसान, जिम्मेदारी की जंजीर कौन खींचेगा? आखिर सवाल यह नहीं है कि रात में सड़क पर बैठा गोवंश वाहन चालक को दिखाई देगा या नहीं। बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनसुरक्षा के लिए उसे सड़क पर रहने ही क्यों दिया जा रहा है?क्योंकि रेडियम चमक रहा है... सड़कें भी दिख रही हैं... खतरा भी सामने है... अब जिम्मेदार व्यवस्था की आंखें कब खुलेंगी?


कैलाश आचार्य स्वतंत्र (पत्रकार)

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