न्यायालय की सजा के बाद शिक्षा विभाग का प्रहार: रिश्वतखोर बाबू की सेवा समाप्त।
बलरामपुर। भ्रष्टाचार पर नकेल कसते हुए शिक्षा विभाग ने कड़ा संदेश दिया है। BEO कार्यालय वाड्रफनगर में संलग्न सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम को न्यायालय द्वारा दंडित किए जाने के उपरांत शासकीय सेवा से पदच्युत कर दिया गया है।
जानिए क्या है पूरा मामला....
13 अगस्त 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर ने गौतम सिंह को 12 हजार रुपए की अवैध उगाही करते हुए दबोचा था। आरोप था कि शिक्षक नितेश रंजन पटेल के बकाया एरियर के भुगतान के एवज में उन्होंने 20 हजार की मांग रखी थी।
गिरफ्तारी के पश्चात 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के कारण कलेक्टर के आदेश से उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया था।
न्याय और अनुशासन दोनों का डंडा
विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बलरामपुर ने 15 मई 2026 को सुनवाई के बाद अभियुक्त को दोषी करार दिया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के अंतर्गत उन्हें 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया।
न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होते ही जिला शिक्षा अधिकारी ने विभागीय प्रक्रिया पूर्ण कर गौतम सिंह की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।
आरोपी की मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंजानी, वाड्रफनगर में थी।
सरकारी तिजोरी पर हाथ डालने वालों के लिए कानून और विभाग दोनों तैयार हैं। अब रिश्वतखोरी का अंजाम सिर्फ निलंबन नहीं, बर्खास्तगी और कारावास है।।

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