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रायगढ़ में अवैध कमाई का खूनी खेल; नियमों को ताक पर रखकर निजी मकानों पर लटके मौत के ढांचे, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल!

CG EYE 24 Admin · 31 मई 2026 · सुभाष चौक

रायगढ़@CG EYE 24 न्यूज :- रायगढ़ शहर इन दिनों एक ऐसे 'मौत के जाल' के साये में है, जहां चंद रुपयों की कमाई के लिए निजी मकानों की छतों पर असुरक्षित और विशालकाय लोहे के होल्डिंग्स लगाए गए हैं। सुभाष चौक पर घटित हालिया हादसे ने प्रशासनिक तंत्र की चूलें हिला दी हैं, जहां ममता दास नाम की एक युवती मौत के मुंह में जाते-जाते बची। मगर, घटना के इतने घंटे बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार महकमे—पुलिस और नगर निगम—की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

हादसे में ममता के सिर पर 11 टांके आए हैं और पीठ में गंभीर अंदरूनी चोटें हैं। अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी पीड़िता का दर्द केवल चोटों तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम के बेरुखे रवैये से और गहरा हो गया है। पीड़िता ने स्पष्ट किया है कि थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, अभी तक पुलिस का कोई भी जांच अधिकारी न तो उनके पास पहुंचा और न ही उनका आधिकारिक कथन लिया गया है, जिससे पुलिस की संवेदनहीनता साफ झलक रही है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब इस मामले पर नगर निगम से जवाब मांगा गया, तो अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह होल्डिंग निगम का नहीं है और न ही इसके लिए कोई परमिशन ली गई है। सवाल यह उठता है कि अगर यह होल्डिंग अवैध है और बिना अनुमति के निजी मकान पर लगाया गया है, तो नगर निगम का अमला अब तक क्या कर रहा था। नगर निगम के विज्ञापन नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर होल्डिंग लगाने के लिए तकनीकी सुरक्षा प्रमाण पत्र और नगर निगम से वैध अनुमति अनिवार्य है। बिना परमिशन के लगा यह 'निजी' होल्डिंग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसे लगाने वाला मकान मालिक और होल्डिंग मालिक सीधे तौर पर इस हादसे के जिम्मेदार हैं। प्रशासनिक मौन यह दर्शाता है कि अवैध होल्डिंग के माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। वही पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया किसी प्रकार का इलाज को लेकर भी होल्डिंग और मकान मालिक के द्वारा ना देखने आये ना इलाज का खर्च दिया जा रहा है।

पीड़िता ममता दास ने रायगढ़ विधायक से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूछा है कि क्या एक आम नागरिक की जान की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने मांग की है कि शहर में निजी भवनों पर लगे सभी अवैध और जर्जर होल्डिंग्स का सर्वे कर उन्हें अविलंब हटाया जाए, जिम्मेदार भवन स्वामी और होल्डिंग मालिक पर गैर-इरादतन हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हो और पीड़िता के इलाज का पूरा खर्च तथा क्षतिग्रस्त स्कूटी का उचित मुआवजा दिलाया जाए। क्या नगर निगम की जिम्मेदारी केवल राजस्व वसूलना है, या शहर की सुरक्षा का जिम्मा भी उन्हीं का है? अवैध होल्डिंग्स के खिलाफ यह चुप्पी किसी और की जान भी ले सकती है, इसलिए प्रशासन को अब अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

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