रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति की राज्यस्तरीय परामर्श बैठक रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस के कन्वेंशन हॉल में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई ने की। समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राऊत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह भी मौजूद रहे।
बैठक में रायगढ़ से राष्ट्रीय मछुवारा संघ के युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ढीमर ने प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया और मछुवारा समाज से जुड़े सामाजिक एवं पारंपरिक मुद्दों को समिति के समक्ष रखा।
पारंपरिक व्यवस्था और अधिकारों की सुरक्षा की मांग
बैठक में सुरेश ढीमर और प्रतिनिधिमंडल ने मछुवारा समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, ग्राम पंचायत प्रणाली तथा महासभा की नियमावली का उल्लेख करते हुए कहा कि विवाह, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में समाज की अपनी सामाजिक व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने UCC तैयार करते समय ऐसी पारंपरिक व्यवस्थाओं और सामाजिक अधिकारों के संरक्षण पर विचार करने की मांग रखी।
लिव-इन संबंधों के प्रावधान पर जताया विरोध
परामर्श के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित UCC में लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई। सुरेश ढीमर ने कहा कि भारतीय सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इस प्रावधान पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि ऐसे प्रावधानों का ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था और पारिवारिक ढांचे पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
यह उल्लेखनीय है कि बैठक का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों और संगठनों से UCC से जुड़े सुझाव एवं आपत्तियां सुनना था। अंतिम प्रावधान क्या होंगे, यह समिति की प्रक्रिया और आगे होने वाले विचार-विमर्श के बाद ही स्पष्ट होगा।
मछुवारा समाज के प्रतिनिधि हुए शामिल
बैठक में राष्ट्रीय मछुवारा संघ की प्रदेश अध्यक्ष गायत्री गायग्वाल, महामंत्री मनहरण धीवर, विधानसभा अध्यक्ष धमतरी रूपचंद धीवर, राजेंद्र धीवर और भागीरथी मटियारा सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सुरेश ढीमर की राज्यस्तरीय परामर्श बैठक में भागीदारी को मछुवारा समाज के प्रतिनिधियों ने समाज से जुड़े मुद्दों को व्यापक मंच पर रखने के अवसर के रूप में बताया और उन्हें बधाई दी।