रायगढ़। कलेक्टर कार्यालय रायगढ़ द्वारा 30 जून 2025 को जारी आदेश में लेखापाल जे.आर. चेलकर का प्रशासनिक आधार पर जनपद पंचायत लैलूंगा से जनपद पंचायत खरसिया स्थानांतरण स्पष्ट रूप से किया गया था। यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन की स्थानांतरण नीति 2025-26 के तहत जारी हुआ, जिसमें समय-सीमा का भी साफ उल्लेख किया गया था।
आदेश में निर्देश था कि संबंधित कर्मचारी 10 दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करेंगे, अन्यथा स्वतः भारमुक्त माने जाएंगे। बावजूद इसके, आदेश जारी होने के महीनों बाद भी लेखापाल जे.आर. चेलकर का लैलूंगा जनपद में ही बने रहना कई सवाल खड़े करता है।
यह स्थिति न सिर्फ शासन के आदेशों की अवहेलना को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि स्थानांतरण आदेशों का पालन नहीं होगा, तो नीति और प्रक्रिया की सार्थकता पर ही सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या आदेश केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं, या फिर ‘अंगद के पांव’ की तरह जमे अधिकारियों पर कार्रवाई करने से प्रशासन पीछे हट रहा है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और आगे होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।