सारंगढ़ बिलाईगढ़ एडिशनल एसपी और रायगढ़ एडिशनल एसपी पहुंचे मौके पर , कार चालक सजन अग्रवाल के साथ सह-आरोपी रिंकन अग्रवाल को देर शाम रायगढ़ से गिरफ्तार
सारंगढ़–बिलाईगढ़:- सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला अंतर्गत सरिया तहसील के अटल चौक में बीते कल सुबह 8 से 9 बजे के बीच हुआ भीषण सड़क हादसा पूरे क्षेत्र को भीतर तक हिला दिया है और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार और लापरवाही से दौड़ती कार ने बरपाली के दो स्कूली मासूम बच्चों को रौंद दिया। जिसमें 07 वर्षीय हर्षित पटेल की मौके पर ही मौत, वहीं उसकी बहन 07 वर्षीय जिया पटेल ने रायगढ़ में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया तथा इनके परिजन मेघनाथ पटेल गंभीर रूप से घायल हैं और दोनों पैर खो चुके हैं जिनका इलाज अभी भी जारी है।

आरोपी ड्राइवर और सह-आरोपी की भूमिका पर क्षेत्र में गहरी नाराजगी…
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद कार चालक आरोपी सजन अग्रवाल को सरिया निवासी रिंकन अग्रवाल ने न केवल भीड़ से बचाया बल्कि पुलिस स्टेशन तक पहुंचाने में भी मदद की और मौके से भाग गया। भीड़ का गुस्सा तब और बढ़ गया जब आरोपी की वायरल तस्वीर पुलिस थाने की दूसरी मंजिल पर आराम से बैठते हुए सामने आई। इससे भड़के लोगों ने थाने का घेराव किया,पर पुलिस ने मुख्य गेट बंद कर भीड़ को भीतर आने से रोक दिया। स्थानीय लोग अटल चौक पर लौटकर 6–7 घंटे तक चक्काजाम कर बैठे। क्षेत्रवासियों की मांग थी कि आरोपी के साथ-साथ उसे बचाने वाले व्यक्तियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए। पुलिस ने बाद में कार चालक सजन अग्रवाल के साथ सह-आरोपी रिंकन अग्रवाल को देर शाम रायगढ़ से गिरफ्तार किया तब कहीं जाकर सारंगढ़ बिलाईगढ़ एडिशनल एसपी और रायगढ़ एडिशनल एसपी के समझाइश के बाद चक्काजाम खुला।

बार-बार ओवरस्पीडिंग के बाद भी ड्राइवर को खुली छूट! परिवहन विभाग पर उठ रहे गंभीर सवाल…
इस हादसे का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मासूमों की जान लेने वाला आरोपी सजन अग्रवाल पहले भी 3–4 बार ओवरस्पीडिंग में चालान काटा जा चुका था,जिसकी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है। लेकिन परिवहन विभाग द्वारा कोई कठोर कार्रवाई नहीं किए जाने से यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि….?
जब विभाग ने स्वयं चालान काटे तो फिर लाइसेंस निलंबन या सख्त दंड क्यों नहीं दिया गया?…
स्थानीय जानकारों का कहना है कि यदि परिवहन विभाग समय रहते आरोपी के खिलाफ लाइसेंस सस्पेंशन,काउंसलिंग या गाड़ी जप्त जैसी कार्रवाई करता तो संभव है कि दो मासूम बच्चों की जान आज बच जाती।
परिवहन विभाग की ढिलाई बनी मौत का कारण…?
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ओवरस्पीड के चालान किसी भी वाहन चालक को “हाई रिस्क ड्राइवर” की श्रेणी में डालते हैं। ऐसे में विभाग पर यह जिम्मेदारी बनती है कि वह— लाइसेंस निलंबित करे। मॉनिटरिंग बढ़ाए
दोबारा चालान होने पर कड़ी सजा दे…
लेकिन अफसोस विभाग ने सिर्फ ऑनलाइन चालान काटकर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली और नतीजा हुआ दो मासूमों की असमय मौत।
अब विभाग के लिए भी परीक्षा की घड़ी—क्या बदलेगा सिस्टम?
यह हादसा विभाग की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालचिन्ह है। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग— ओवरस्पीडिंग चालान वाले चालकों की सूची बनाकर तत्काल कार्रवाई करता है या नहीं? हाई रिस्क ड्राइवरों की मॉनिटरिंग के लिए नई व्यवस्था लागू करता है? और क्या भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए संवेदनशीलता और तत्परता दिखाता है।
बहरहाल दो मासूम बच्चों की मौत और एक पिता की गंभीर हालत ने पूरे अंचल को शोक,आक्रोश और सवालों से भर दिया है। लोगों की मांग एक ही है— लापरवाह ड्राइवर और उसे बचाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, और परिवहन विभाग इस हादसे से सबक लेकर अपने सिस्टम को दुरुस्त करे, ताकि ऐसी हृदयविदारक घटनाएं दोबारा न हो।